चले आओ पास मेरे अब ये दूरियां बुलाती है

जाने क्यों अब ये बिस्तर की सिलवटे भी सताती है

तेरे सांसो की खुशबू आज भी हमारे शहर में है

जो अक्सर ये गुजरती हवाएं मुझे यूँ ही बताती है