मेरे “कलम” से “लफ्ज़” “खो” गए शायद,

“आज” वो भी “बेवफा” हो गए शायद…

जब “नींद” खुली तो “पलकों” में “पानी” था

मेरे “ख्वाब” मुझपे “रो” गए शायद…!!