‘फोन’.. जब तक ..’वायर’ से ‘बंधा’ था

“इंसान आजाद था” ,

जब से फोन ‘आजाद’ हुआ है

‘इंसान’ फोन से ‘बंध’ गया है….

‘उँगलियाँ’ ही …‘निभा’ रही हैं… ‘रिश्ते’ आजकल

‘ज़ुबाँ’ से निभाने का …‘वक्त’ कहाँ है….

सब …‘टच’… में …‘बिजी’ है

पर …..’टच’ में ……..कोई नही है …!

🙏🏻 🌷🌷 🙏🏻

🌺नमस्कार 🌺