“सराफत की कसम मेरी , वो तुझपे टूट जाती है

चमकते आँख देखूँ तो , तारीफें छूट जातीं है

कोसती नजरें मुझको यूं तेरे दीदार की खातिर

जो फूल सा रूप न देखू , धड़कनें रूठ जाती हैं।”